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साबुत अनाज और साबुत(भूरा) चावल

क्यों 

साबुत अनाज और साबुत भूरा चावल - इनका जितना महीन चूरा किया जाएगा, उनकी शर्करा को शरीर उतनी ही तेजी से सोखेगा,इससे इनका "ग्लाईसैमिक इन्डैक्स" बढ़ जाता है। ये हृदय रोग और मधुमेह के लिए अच्छा नही है। 

 

 

 

ये बात वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है कि अगर रोजाना इनकी (४८ ग्राम) मात्रा तीन बार ली जाए तो ये हृदय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगी।

सामान्य आहार में कई अच्छे तत्व होते हैं जैसे फाइबर, मिनरल और विटामिन, जो रिफाइनिंग में खत्म हो जाते हैं। ब्रान यानी चोकर और जर्म में विटामिन बी मिनरल और बीटेन की काफी मात्रा होती है। संसाधित आहारों में सस्ते फाइबर की अक्सर कमी होती है। फाइबर से विषैलों तत्वों में कमी आती है और कोलोन कैंसर का खतरा करीब एक तिहाई तक घट जाता है। साबुत अनाजों (जई) फलों, बीन्स और सब्जियों में मिलने वाले तत्व कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।

 

फाइबर करीब ३० ग्राम प्रतिदिन, ये अमरीकी औसत से दो गुना ज्यादा है। ५० ग्राम प्रतिदिन लेने से मधुमेह में लाभ होता है।

अगर किसी उत्पाद पर एनरिच्ड लिखा हो तो उसका मतलब है कि वह साबुत नही है।

अगर आप अलसी के पिसे हुए दो चम्मच बीज लें तो आपको अपने शरीर की जरूरत के मुताबिक ज्यादातर फाइबर और पौधों पर आधारित ओमेगा-३ मिल जाएगा। ये अतिरिक्त एल पी(ए) कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और आपको नियमित और तंदुरूस्त बनाए रखने में मदद करता है।

हार्वर्ड की 'नर्सेज स्टडी' ने पता लगाया है कि जो लोग हर रोज साबुत अनाज या चावल से बनी चीजें ढाई बार खाते हैं उनके हृदय रोगों में (सी एच डी) ३० प्रतिशत से भी ज्यादा कमी देखी गई है, ये तुलना उन लोगों से की गई थी जो इन चीजों को सप्ताह में एक बार खाते हैं। (अमेरिका में ये औसत १/२ है।)

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