घर पर पकाए हुए खाने की खूबियां!
घर पर बनाए हुए खाने के कई फायदे हैं जिनके बारे में हम सभी को जानना चाहिए और साथ ही और लोगों को बताना भी चाहिए।

 

  • इससे यह सुनिश्चत होता है कि आप हर रोज स्वास्थ्यकारी और पोषक आहार लेंगे। व्यावसायिक रूप से परिरक्षित और डिब्बाबंद खाने की अपेक्षा ताजे भोजन में पोषक तत्वों, विटामिनों, एंटीऑक्सीडेंटस और सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है।
  • घर पर बनाई हुई चपातियां और पूर्ण अनाज शारीरिक क्रियाशीलता प्रदान करते हैं। ये साबुत अनाज कई प्रकार की बीमारियों से बचाते हैं। इन साबुत अनाजों में फाइबर, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंटस और अन्य कई लाभदायक तत्व पाए जाते हैं। साबुत अनाज हृदय रोग, कैंसर, हाई ब्लडप्रैशर, डायबिटीज जैसे रोगों को रोकने में मदद करते हैं। अगर आपको पहले ही डायबिटीज है तो ये ब्लड शुगर स्तर को बेहतर ढंग से नियंत्रित करते हैं। पॉलिश किए हुए अनाज के सेवन से बचना चाहिए।
  • घर पर पीसे हुए मसाले स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होते हैं। इनमें कैंसर और उम्र को बढ़ने से रोकने जैसे गुण पाए जाते हैं। ये मसाले कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंटस और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें कई अम्लों के लाभदायक अनोखे मेल पाए जाते हैं और इनमें ओमेगा-3, फैटी एसिड और कई अन्य फैटी एसिड शामिल हैं।
  • जब हम घर का बना ताजा खाना खाते हैं तो हम कम नमक और कम प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल करते हैं। (यदि हम घर के खाने की तुलना होटल के खाने, पहले से तैयार और पैक खाने और फास्ट फूड से करते हैं, तो घर का बना खाना कहीं बेहतर सिद्ध होता है।)
  • घर पर ताजा खाना बनाने में ज्यादा शारीरिक गतिविधि होती है क्योंकि हम खाना तैयार करने के विभिन्न चरणों में शरीर के अलग-अलग अंगों को व्यायाम का अवसर देते हैं।
  • घर पर पकाया खाना पर्यावरण के प्रति भी अनुकूल होता है।
  • ताजी हरी चटनियां शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ावा देती है, साथ ही इसमें पाए जाने वाले ऑक्सीडेंट, सूक्ष्म पोषक तत्वों और विटामिनों से पोषण भी प्राप्त होता है। ये चटनियां खाने को स्वाद, खूशबू और पोषण प्रदान करती हैं जिनसे स्वास्थ्य के लिए कई फायदे हैं। जो चटनियां घर से बाहर बनाई जाती हैं, उनसे संक्रमण हो सकते हैं क्योंकि कई बार इनमें डलने वाले पदार्थों को ठीक से साफ किया या धोया नही जाता। कई चटनियों में ऐसे प्रिजर्वेटिव होते हैं जो बहुत नुकसानदायक होते हैं क्योंकि इनमें अतिरिक्त लवण के अलावा ऑक्सीडेंट भी होते हैं जिनसे कैंसर जैसे रोगों को बढ़ावा मिलता है। (ताजी चटनी को ज्यादा समय तक सम्भाल कर नही रखा जा सकता)

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हेल्दी इंडिया
पीसी वर्ल्ड वेब 2008 से पुरस्कृत
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